Yadav veerangana Ganga jamna nekan sironj mp
यादव बेटियों ने हिंदुत्व की शान के खातिर कटा दिये अपने शीश
ग्राम :- नैकान, सिरोंज जिला विदिशा
बलिदानी गंगा - जमना
कटे शीश, सजे थालों में।
गाय किस्से राई फगवारो में ।।
यादव जागीरदार ने अपनी लड़कियों के शीश काट दिए लेकिन अपने हिंदू रक्त को न लज्जित होने दिया ।
विदिशा जिले के सिरोंज तहसील के ग्राम नैकान जो किसी समय टोंक नवाब के अधीनस्थ हुआ करता था। हिंदू शादी में फूट के कारण टोक नवाब सिरोंज तक सीमा बढ़ाने में सफल रहा अपने लोगों की रक्षा के लिए कई देशभक्त स्वाभिमानी जमींदारों को नवाब के अधीनता स्वीकार करनी पड़ गई।
एक समय का वाक्या है सिरोंज नवाब शिकार खेलता हुआ अपनी सेना सहित ग्राम नेकान पहुंच गया । वह पहले भी अक्सर शिकार के लिए आया करता था और नैकान के यदुवंशी जागीरदार श्री दंगल सिंह हिंदुत्व के अतिथि देवो भव: की परंपरा का निर्वाह करते हुऐ अपने सामर्थ्य अनुसार सत्कार किया। उसी समय नवाब की नजर जमीदार की दो कन्याऔं पर पड़ गई क्योंकि वह बहुत ही सुंदर थी जिनके खाए हुए पान भी उनके गालों से नजर आया करते थे इतनी सुंदर लड़कियों को देखते हुए नवाब जमीदार से कहने लगा हम आपकी लड़कियों से निकाह करना चाहते हैं आपकी दोनों लड़कियां तो हमारे लायक हैं इतना सुनते ही बरगद के नीचे दरबार में बैठे सभी यदुवंशियों ने अपनी तलवार खींच ली । गंभीर स्वाभाव के जमीदार ने सबको ठहराते हुए कहा हम आपको कुछ देर में जवाब देंगे। वह सभा से उठकर अपने घर आए और अपनी दोनों कन्याओं से पूछा कि तुम मेरे आधीन हो या नवाब के। कन्याओं ने कहा पिता महाराज हमारे शरीर की बूंद बूंद आपकी दी हुई है आप जैसा चाहेंगे वही होगा। जमीदार साहब जानते थे कि युद्ध हुआ तो भी हार हमारी निश्चित है और हार के बाद भी यह पापी दोनों कन्याओं को लेकर चला जाएगा और इससे यदुवंशी हिंदू रक्त का भी अपमान होगा हमारी संस्कृति का अपमान होगा जिसको हम सदियों से सवारते सजाते आ रहे हैं यह सब विचार करने के बाद जमीदार साहब ने अपनी दोनों कन्याओं से कहा कि आप सोलह सिंगार कर कर आ जाऔ। दोनों ने सोलह सिंगार करके जमीदार साहब के सामने उपस्थित हुई जमीदार साहब ने कहा पुत्री आज मान सम्मान के लिए बलिदान का दिन है अपने पुरखों के मान पर आंच न आए इसलिए आज तुम्हें बलिदान देना पड़ेगा। पिताजी हमारा यह शरीर आप का दिया हुआ है आप जैसा उचित हो वैसा करें। तब जागीरदार दंगरसिंह ने अपनी दोनों लड़कियों के शीश काट दिये और उन्हें एक थाल में सजाकर नवाव के पास ले चले।ताकि नवाव का भी शीश काट सकें। जमीदार साहब लड़कियों के शीश लेकर घर से बाहर निकले । उन शीशो को देख यदुवंशी सरदारों में क्रोध की आग फैल गई और सारे के सारे जय दादा कृष्ण हर हर महादेव के नारे लगाते हुए नवाब की सेना पर टूट पड़े किंतु में कपटी नवाब वहां से बच निकला ।
धन्य है वह पिता जिसने अपनी धर्म रक्षा के लिए अपनी पुत्रियों का शीश काटा
धन्य है वे कन्याये जिन्होंने अपने कुटुंब की मर्यादा के लिए प्रसन्नता और गर्व से अपने प्राण न्योछावर कर दिए ।
धन्य है भारत भूमी
धन्य है सनातन संस्कृति
धन्य है यदुवंश
यत्र नारी पूज्यंते रमंते तत्र देवता

