ठाकुर मोती सिंह यदुवंशी
ठाकुर मोती सिंह यदुवंशी सेहजाखेड़ी खेड़ी जागीर के जोरावर जागीरदार थे।
एक मर्तबा शमशाबाद के अमीर लाला जी सेहजाखेड़ी दरबार में उपस्थित हुए। ठाकुर मोती सिंह जी हम बड़ी मुसीबत में हैं मेवाती लुटेरे ने हमारी हवेली को लूटने का मंसूबा तैयार कर लिया है। बड़ी विनम्रता और भरोसे के साथ हम आपके सामने अपनी रक्षा की गुहार लगाते हैं। क्षत्रिय धर्म को निभाते हुए आप हमारी रक्षा करें। ठाकुर मोती सिंह जी ने उनसे कहा आप निर्भय हो जायें। कोई भी मेवाती आप को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। इसके बाद ठाकुर साहब ने अपने सभी धसजातीय जागीरदारों के यदुवंशी ठिकानों को संदेशा भिजवा दिया और सभी ने एकत्रित होकर शमशबाद के पठार पर डेरा लगा दिया। दूसरे ही दिन मेवाती लूटेरों से जमकर लडाई हुई। लूटेरे मेवों के रण खेतों से पैर उखड गये। मेवातीयो के सरदार को दंडबंधा लिया गया ।
मेवितीयों के सरदार ने क्षमा प्रार्थना की और भविष्य में इस इलाके में कभी भी वह और उसके साथियों द्वारा लूटपाट नहीं की जाएगी यह वचन दिया। बार-बार क्षमा मांगने से ठाकुर मोती सिंह जी ने उसे क्षमा कर दिया और उसके दंड खुलवा दिए।
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अमर रहो यादव राजघराने गिरधर के प्यारे।
भूपन में भूप तू ही गिरधर के रूप तू ही।।
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इस पोस्ट का आधार लोकिक किम्बदंतियां
जय द्वारिकाधीश। जय मां भवानी। जय मां भारती।


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