ठकुराइन के प्राण से हुई धुआंधार बारिश
एक बार पट्टन जागीर में भारी सूखा पड़ा। लोग पानी के लिए तरसने लगे। कुछ लोगों ने त्रेता युग की कथा याद कर के जनक जी और उनकी पत्नी सूनेना द्वारा हल चलाया और उसी से पानी बरसा। इस को याद कर कई आसपास के गांवों की महिलाएं पट्टन पहुंची और उन्होंने ठकुरान श्री से प्रार्थना की । कि अगर आप खेत में हल चलाएं तो परमात्मा की कृपा से हमारे इलाके में बारिश हो जाएगी । ठकुराइन जी ने ठाकुर मर्दन सिंह जी से कहा कि मैं सभी की इच्छा को पूरा करने के लिए खेत में हल चलाने जाना चाहती हूं । आप मुझे आज्ञा दे दें । मर्दनसिंह जी ने कहा क्या तुम्हें विश्वास है कि तुम्हारे हल चलाने से बारिश हो जाएगी । उन्होंने कहा हां मुझे पूरा विश्वास है । जिस तरह महाराज जनक के हल चलाने से उनके राज्य में सूखा मिट गया था । उसी तरह अगर मैं भी हल चलाऊंगी तो हमारे राज्य में भी सूखा मिट जाएगा । ठाकुर मर्दन सिंह जी ने कहा, ठीक है चले जाओ। लेकिन अगर बारिश नहीं हुई तो वापस लौट कर मत आना । अगर बिना पानी गिराये वापस आई तो मैं अपने तेगा से ही तुम्हारी गर्दन को काट दूंगा । अब फैसला तुम कर लो तुम्हें जाना है या नहीं । राजधर्म को मानने वाली ठकुराइन ने फैसला किया कि मैं अपने प्रजा के लिए अवश्य जाऊंगी और बह चली गई । मर्दनसिंह जी उनकी परीक्षा ले रहे थे । ठकुराइन को अपने कर्म पर विश्वास है या नहीं।
नंगे पैर ठकुराईन खेतौ पर पहुंच कर जैसे ही हल चलाया। ईश्वर की कृपा से धुआंधार पानी बर्षना शुरू हो गया। जगह-जगह तालाब भर गए, नदी उफान मारने लगी।
इस तरह सूखा का संकट टल गया और चारों तरफ हरियाली छा गई लोग झूम उठे हर्षोल्लास चारों तरफ मनाया जाने लगा।
ओमप्रकाश शर्मा
सतपाडा

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