ठाकुर मर्दन सिंह ने अपना कर्ज ब्राह्मण के ऊपर से किया माफ।
बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार पट्टन में इलाहाबाद से एक परिवार पहुंचा। जिसके साथ हाथ जुड़ा हुआ एक बालक था ।उनसे पूछा आप लोगों का यहां आना कैसे हुआ। तब उन्होंने बताया कि हम पट्टन के जागीरदार मर्दन सिंह जी से मिलने आए हैं ।
दूसरे दिन मर्दन सिंह जी की कचहरी में उन्हें पहुंचा दिया गया। मर्दन सिंह जी ने उनसे पूछा आप लोग इतनी दूर से किस काम से यहां तक आए हैं । तब उन्होंने बताया कि हमारा यह बालक जन्म से ही दोनों हाथ जुड़े हुए पैदा हुआ है। बहुत इलाज कराया लेकिन इसको फायदा नहीं हुआ । कई देवी-देवताओं के पास गए । ज्यादातर देवी देवताओं ने बताया की यह बालक पिछले जन्म में इलाहाबाद में पूजन कराने वाला पंडित था । जिसे पट्टन के जागीरदार मर्दन सिंह ने पूजा करने के लिए धन दिया । किंतु इस व्यक्ति ने वह धन भी रख लिया और पूजा भी नहीं की। इसलिए जब तक पट्टन के मर्दन सिंह का इसके ऊपर कर्ज रहेगा । तब तक इसके हाथ जोड़े ही रहेंगे । अगर मर्दनसिंह कर्ज माफ कर दें तो इसके हाथ खुल जाएंगे।
इलाहाबाद से आए हुए परिवार के बार-बार प्रार्थना करने पर ठाकुर मर्दन सिंह अपनी कुलदेवी हिंगलाज भवानी के मंदिर में गए और माता से प्रार्थना की। हे मां भवानी इस बालक को स्वस्थ कर दो और इस बालक को कर्ज मुक्त करने की मुझे शक्ति दो । पूरा एक दिन मां भवानी के दरबार में खड़े रहे। जब हिंगलाज माता का इशारा हुआ । तब कचहरी वापस लौट आकर उन्होंने भरी कचहरी में हाथ जुड़े हुए उस बालक के सामने खड़े होकर कहा । कुलदेवी हिंगलाज की कृपा से मैंने तुम्हें अपने कर्ज से मुक्त किया । इतना कहते ही उस बालक के हाथ खुल गए । पूरा परिवार ठाकुर मर्दन सिंह के जयकारे लगाता हुआ यथा स्थान वापस चला गया। माता हिंगलाज के ऐसे सच्चे भक्त थे ठाकुर मर्दन सिंह । यह कहानी आज भी कभी-कभार बुजुर्गों के मुंह से सुनने को मिल जाती है।
जय द्वारकाधीश
जय ठाकुर मर्दन सिंह
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